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Saturday, October 6, 2018

विधानसभा चुनाव / मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को होगा मतदान, 11 दिसंबर को मतगणना

image credit-https://bhaskar.com

😄विधानसभा में भाजपा के पास 165 सीटें, लोकसभा की 26 सीटों हैं 

भोपाल। चुनाव आयोग ने मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों में चुनाव की घोषणा कर दी है। मध्य प्रदेश में 28 नवंबर को मतदान और 11 दिसंबर को मतगणना होगी। विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो गई है। अभी इन राज्यों में से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भाजपा की सरकार है। मुख्य चुनाव आयुक्त चुनाव ओपी रावत ने कहा कि आज से सभी राज्यों में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है। मध्य प्रदेश की सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों में एक साथ मतदान होगा। 

मुख्य चुनाव आयुक्त चुनाव ओपी रावत ने कहा कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के हलफनामे के नियमों में भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक बदलाव किया गया है। उन्हें उन विज्ञापनों के बारे में बताना होगा जो उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों के संदर्भ में मीडिया में प्रकाशित कराए हैं। 

ऐसा है चुनावी कार्यक्रम
नोटिफिकेशन : 2 नवंबर
नॉमिनेशन की आखिरी तारीख : 9 नवंबर
नॉमिनेशन की स्क्रूटनी : 12 नवंबर
नॉमिनेशन वापस लेने की आखिरी तारीख : 14 नवंबर
वोटिंग : 28 नवंबर
मतगणना: 11 दिसंबर

सत्ता के दावेदार: शिवराज सिंह चौहान, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया
लोकसभा सीटें:  कुल 29, इनमें से भाजपा के पास 26 और कांग्रेस के पास 3 सीटें।
प्रचार के तीन ही चेहरे : नरेंद्र मोदी, अमित शाह, राहुल गांधी

2013 में किसे कितनी सीटें मिलीं?

दल मध्य प्रदेश 
भाजपा 165 
कांग्रेस 58
बसपा 4
अन्य 3
कुल सीटें 230
अभी किसकी सरकार भाजपा 

पिछली बार की स्थिति: प्रदेश में कुल 230 सीटें हैं और विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 116 है। 2013 के चुनाव में भाजपा ने 71.7% वोट हासिल करते हुए 165 सीटों पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस 58 सीटों पर सिमट कर रह गई थी। उसे 25.2% वोट मिले थे। बसपा 5 सीटों पर जीत दर्ज करने में कामयाब रही थी। 

कितने और कैसे मतदाता
(युवा मतदाता :1 करोड़ 37 लाख 83 हजार वोटर हैं) 
कुल मतदाता:  मतदाता 5,03,94,086 
युवा मतदाता: 20 से 29 वर्ष 1,37,83,383
पुरुष मतदाता: 2,63,14,957
महिला मतदाता: 2,40,77,719
18 से 19 साल: 15,78,167
30 से 39 साल: 1,28,74,974
40 से 49 साल: 99,30,546
50 से 59 साल: 63,58,853
60 से 69 साल: 35,45,733
70 से 79 साल: 16,85,339
80 वर्ष और उससे अधिक: 5,77,265

ये भी जानें : पिछले चुनाव में कुल 4 करोड़ 66 लाख मतदाता थे।

मतदान केंद्र बनाए जाएंगे
कुल: 65341 मतदान केन्द्र
शहरी क्षेत्र:  17036 
ग्रामीण क्षेत्र:  48305 

आचार संहिता के बाद क्या होगा : चुनावों की घोषणा के साथ ही चुनाव आचार संहिता लग जाती है। राज्य सरकार और प्रशासन पर कई बंदिश लग जाती हैं। राज्य के सरकारी कर्मचारी चुनाव आयोग के अधीन हो जाते हैं। वोट पाने के लिए किसी भी स्थिति में जाति या धर्म आधारित अपील नहीं की जा सकती। मस्जिद, चर्च, मंदिर या दूसरे धार्मिक स्थल का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के मंच के तौर पर नहीं किया जा सकता है। वोटरों को रिश्वत देकर, या डरा धमकाकर वोट नहीं मांग सकते। वोटिंग के दिन मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में वोटर की कन्वैसिंग करने की मनाही होती है। मतदान के 48 घंटे पहले पब्लिक मीटिंग करने की मनाही होती है। मतदान केंद्र पर वोटरों को लाने के लिए गाड़ी मुहैया नहीं करा सकते। 

जुलूस संबंधी नियम: राजनीतिक पार्टी या प्रत्याशी जुलूस निकाल सकते हैं। लेकिन इसके लिए उन्हें इजाजत लेनी होगी। जुलूस के लिए समय और रूट की जानकारी पुलिस को देनी होगी, अगर एक ही समय पर एक ही रास्ते पर 2 पार्टियों का जुलूस निकलना है तो इसके लिए पुलिस को पहले से इजाजत मांगनी होगी ताकि किसी तरह से दोनों जुलूस आपस में न टकराएं और न ही कोई गड़बड़ी हो किसी भी स्थिति में किसी के पुतला जलाने की इजाजत नहीं होगी। 

सरकार पर पाबंदी: चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा नजर मौजूदा सरकार पर होती है, चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें, सभी सरकारें चुनाव आचार संहिता के दायरे में आएंगी। किसी भी स्थिति में सरकारी दौरे को चुनाव के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल चुनावों के लिए नहीं होना चाहिए। सरकारी गाड़ी या एयर क्राफ्ट का इस्तेमाल नहीं कर सकते। सरकारी बंगले का इस्तेमाल चुनाव मुहिम के दौरान नहीं किया जा सकता। सरकार मंत्री या अधिकारी चुनाव के ऐलान के बाद अपने मंजूर किए गए धन या अनुदान के अलावा अपने विवेक से कोई नया आदेश नहीं दे सकते यानी सीधे शब्दों में कहें कोई नई योजना शुरू नहीं कर सकते। 

यह नियम होंगे लागू : आचार संहिता लागू होने के बाद प्रदेश में किसी नई योजना की घोषणा नहीं हो सकती। हालांकि कुछ मामलों में चुनाव आयोग से अनुमति लेने के बाद ऐसा हो सकता है। मुख्यमंत्री या मंत्री अब न शिलान्यास करेंगे न लोकार्पण या भूमिपूजन। सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं होगा, जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुंचता हो। राजनीतिक दलों के आचरण और क्रियाकलापों पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग पर्यवेक्षक नियुक्त करता है। 

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