हमारी अपील-
● नवदुर्गा उत्सव में पीओपी की मूर्तियां नही, मिटटी की मूर्तियां ही स्थापित करें।
● विसर्जन के लिए घर या कॉलोनी में कुंड बनाकर मूर्तियों को विसर्जित करें
● छोटी मूर्तियों को गमले या पात्र में विसर्जित करें।
● उस पवित्र मिट्टी में एक पौधा लगा दें।
विनोद एम नागवंशी -
मॉनसून की बारिश से जलाशयों का पानी जहां साफ दिखने लगा था, वहीं गणेश चतुर्थी के बाद हजारों प्रतिमाओं के विसर्जन के कारण सोमवार को यह झाग से भर गया। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो, फ़ोटो वायरल हो रही है जिसमें विसर्जन घाट पर कई प्रतिमाएं तैरती हुई नजर आईं- इनमें कुछ आधी गली तो कुछ पूरी प्रतिमाएं थीं। इससे यह संकेत मिलते हैं कि इन्हें प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनाया गया था। जलाशयों में सजावट का सामान, फूल और कपड़े के टुकड़े तैरते नजर आये, जिसने दिखाया कि किस तरह एनजीटी के आदेश की धज्जियां उड़ाई गईं। वही इंदौर से एक तस्वीर आई जिसनें हर किसी के ह्रदय को झकझोर दिया।
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| Picture Credit: Sourse |
आस्था का अपमान है ये-
पीओपी की मूर्तियों से न केवल पर्यावरण को बल्कि धार्मिक आस्था को भी ठेंस पहुंचती है। ये पीओपी की मूर्तियां गलती नहीं हैं ये टूटने-फूटने के बाद भी तालाब, नदियों आदि जलाशयों के आस-पास पड़ी रहती है। जो बेहद खतरनाक है पर्यावरण के लिए। यह धार्मिक आस्था का भी घोर अपमान है लिहाजा मिट्टी की मूर्तियां ही बनाई जानी चाहिए ताकि मिट्टी गल जाए। और पर्यावरण और हमारी आस्था को कोई हानि न हो।पीओपी की मूर्तियों के निर्माण और स्थापना के लिए कड़े से कड़े कानून होने चाहिए। साथ ही आम जनता को भी चाहिये कि वह पीओपी की मूर्तियों की स्थापना बिल्कुल न करें।
जो लोग पीओपी और दूसरे केमिकल से बनी हुई मूर्तियों को नदियों में विसर्जित करते हैं वो जाने अनजाने में खुद के लिए गंभीर बीमारियों को निमंत्रण देते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि पीओपी से बनी हुई मूर्तियों में कई प्रकार के केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है, जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक होते हैं। इस तरह की मूर्तियों में जिन केमिकल रंगों का उपयोग होता है उनमें क्रोमियम,जिंक लेड, और कॉपर जैसे खतरनाक रसायन होते हैं। ये केमिकल जलाशयों में जाकर पानी को प्रदूषित करते हैं। इस तरह के केमिकल से प्रदूषित पानी त्वचा और आंखों की एलर्जी का कारण बनता है। यही नहीं इससे किडनी और लंग्स से जुड़ी बीमारियां भी हो जाती हैं। अगर प्रदूषण का स्तर अधिक है और पानी लंबे समय तक उपयोग किया जाए तो इससे कैंसर भी हो सकता है।
हमारी अपील-
नवदुर्गा उत्सव और अगले साल गणेशोत्सव के लिए पीओपी की मूर्तियों का आप न ही निर्माण होने दें और न ही स्थापना करें। इसकी जगह मिटटी की मूर्तियां ही स्थापित करें। इससे हम जलाशयों को प्रदूषित होने से बचा सकें। इसलिए आप विसर्जन के लिए घर या कॉलोनी में कुंड बनाकर मूर्तियों को विसर्जित करें, यदि छोटी मूर्ति है तो घर पर ही टब या गमले में विसर्जित करें और उस पवित्र मिट्टी में एक पौधा लगा दें।
-विनोद एम नागवंशी (युवा लेखक एवं समाजसेवी)


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