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"आज की सोच आने वाला कल है। आज जो हम बोते हैं। उसी को कल काटने का हकदार बनते हैं। इसलिए हमें हमेशा जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।"
विनोद एम. नागवंशी-
भारत जीवन का उद्देश्य है कि अपने मन, वचन और काया से जरूरतमंदों की मदत करना। हमेशा यह देखा गया है कि जो लोग दूसरों की मदत करते हैं, उन्हें कम तनाव रहता है, आनंद का अनुभव और मानसिक शांति रहती है। वे अपनी आत्मा से अधिक जुड़े हुए महसूस करते हैं, और जीवन उनका संतोषपूर्ण होता है। दरअसल इसके पीछे गुह्य विज्ञान है, जब कोई व्यक्ति अपना मन, वचन और काया को दूसरों की सेवा के लिए उपयोग करता है तो उसे सब कुछ मिल जाता है। उसे सांसारिक सुख सुविधाओं की कभी कमी महसूस नही होती है। जब आप जरूरतमंद लोगों के लिए या दूसरों के लिए कुछ करते हैं तो उसी पल से खुशी की शुरुआत हो जाती है।
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भारत में बढ़ती कुपोषण और भुखमरी की समस्या बेहद चिंताजनक है इस गम्भीर समस्या से निपटने के लिए अब आम जनता को भी आगे आना होगा। करीब हर घर में रोज ही खाना व नाश्ता बचता है। जागरूकता के अभाव में लोग इसे कूड़े में फेंक देते हैं, जबकि यह किसी भूखे के काम आ सकता है। काम कर पाने में अक्षम और गरीबी का सामना कर रहे कई बुजुर्ग और बच्चों को अमूमन भरपेट भोजन नहीं मिलता। कई बार उन्हें भूखे भी रहना पड़ता होगा।
विभिन्न बड़ी बडी मंहगी पार्टियों में पैसा पानी की तरह बहाने से ज्यादा ख़ुशी जरूरतमंदों की सेवा में आता है, यदि बचत की गई राशि से जरूरतमंद लोगों की मदत करें, उन्हें भोजन, वस्त्र आदि दान स्वरूप दें तो देश में में भुखमरी, कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से निपटना आसान हो जायेगा।
- इंजी. विनोद एम. नागवंशी ( लेखक एवं समाजसेवी )


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