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Friday, December 15, 2017

PAK में आतंकियों का कत्लेआम, स्कूल में घुसकर भून दिया था 132 बच्चों को

16, दिसंबर 2014 यानी आज ही के दिन हुए इस हमले में 148 लोग मारे गए थे। इनमें 132 स्कूली बच्चे थे।
Image Source:https://www.bhaskar.com/

पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए आतंकी हमले की आज बरसी है। 16, दिसंबर 2014 यानी आज ही के दिन हुए इस हमले में 148 लोग मारे गए थे। इनमें 132 स्कूली बच्चे थे। आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। बता दें कि इस हमले के बाद गठित एक मिलिट्री कोर्ट ने 4 आंतकवादियों को फांसी की सजा सुनाई थी।प्रिंसिपल को बच्चों के सामने भून दिया था गोलियों से...
  16 दिसंबर, 2014 की सुबह तकरीबन 10.30 बजे पाक सिक्युरिटी फोर्स की पोशाक में सात तालिबानी आतंकी स्कूल के पिछले दरवाजे से आ धमके।
- ऑटोमेटिक वीपन्स से लैस सभी आतंकी सीधे स्कूल के ऑडिटोरियम की ओर बढ़े। जहां मौजूद मासूमों पर उन्होंने अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। तब स्टूडेंट्स वहां फर्स्ट एड ट्रेनिंग के लिए इकट्ठा हुए थे।
- इसके बाद आतंकी एक-एक क्लासरूम में घुसकर फायरिंग करने लगे। कुछ ही मिनटों बाद स्कूल के अंदर लाशें बिछ गईं।
- बच्चों के सामने ही आतंकियों ने स्कूल की प्रिंसिपल ताहिरा काजी को भी गोलियों से भून दिया था। यह देखने के लिए मासूमों को मजबूर भी किया।
- आतंकियों ने कुछ बच्चों को लाइन में खड़ा कर गोलियों से भूना, तो कुछ छिपे बच्चों पर तब तक गोलियां बरसाईं, जब तक उनके चीथड़े न बिखर गए।
- इस कत्लेआम के लगभग 40 मिनट बाद पाक आर्मी ने मोर्चा संभाला। लगभग छह घंटे चले ऑपरेशन में आर्मी और आतंकियों के बीच भारी फायरिंग हुई थी।
बड़े बच्चों को मारने का मिला था ऑर्डर
- पेशावर में हुए इस हमले की जिम्‍मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के प्रवक्ता मोहम्मद खुर्रासानी ने ली थी।
- मोहम्मद ने एक गोपनीय जगह से मीडिया से बात करते हुए कहा कि छह आत्मघाती हमलावर हथियारों से लैस थे और उन्हें स्कूल पर हमले का आदेश दिया गया था।
- तहरीक-ए-तालिबान प्रवक्ता मोहम्मद खोरासनी ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया था कि "उन्हें (आतंकियों) को गोलीबारी और आत्मघाती धमाके करने के लिए भेजा गया।
- इसके अलावा लड़ाकों को आदेश दिया था कि बड़े बच्चों को मार डालें, लेकिन छोटे बच्चों को न मारा जाए।"
- खोरसानी के मुताबिक, "सेना द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन के खिलाफ यह हमला किया गया था।"
- खोरसानी ने कहा है कि सेना के ऑपरेशन जर्ब-ए-अज्ब और ऑपरेशन खैबर-1 के कारण इस हमले को अंजाम दिया गया।
- ये दोनों अभियान उस इलाके में चल रहे थे, जो पिछले पांच साल से तालिबान का गढ़ बना हुआ था।
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