विश्व में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाली मुक्केबाज बनीं
मैरीकॉम विश्व चैम्पियनशिप (महिला और पुरुष) में सबसे ज्यादा पदक जीतने वाली मुक्केबाज भी बनीं। उन्होंने छह स्वर्ण और एक रजत जीतकर क्यूबा के फेलिक्स सेवोन (91 किलोग्राम भारवर्ग) की बराबरी की। फेलिक्स ने 1986 से 1999 के बीच छह स्वर्ण और एक रजत पदक जीता था।
मैरीकॉम ने सभी को शुक्रिया कहा
जीत के बाद मैरीकॉम ने कहा, 'यह मेरे लिए बहुत मुश्किल रहा। आपके प्यार से यह संभव हो सका। मेरा अगला लक्ष्य 2020 टोक्यो ओलिंपिक में गोल्ड जीतना है। 51 किग्रा कैटेगरी ओलिंपिक में मेरे लिए मुश्किल होगा, लेकिन मैं खुश हूं।' उन्होंने कहा, "मैं इस जीत के लिए अपने सभी प्रशंसकों का शुक्रिया अदा करती हूं, जो मुझे यहां समर्थन करने के लिए आए। मैं आप सभी की तहेदिल से शुक्रगुजार हूं। मेरे लिए यह महान पल है।" उन्होंने यह जीत देश को समर्पित की। हना से मुकाबले के बारे में उन्होंने कहा कि यूक्रेनी खिलाड़ी के खिलाफ मैच आसान नहीं था, क्योंकि वह मुझसे लंबी थी।
ऐसे जीतीं मैरीकॉम
पहला राउंड : दोनों खिलाड़ी सावधानी से एक दूसरे खेल को परख रहीं थीं। दोनों ने एकदूसरे के खिलाफ ज्यादा आक्रमण नहीं किए। दोनों ने अपने राइट पंच का अच्छा इस्तेमाल किया। मैरी ने कुछ पंच मारे। इनमें से कुछ अच्छे सही निशाने पर लगे। हना ने भी अपने राइट जैब का अच्छा इस्तेमाल किया, लेकिन मैरीकॉम अपनी फुर्ती से उनके अधिकतर पंचों को नाकाम करने में सफल रहीं।
दूसरा राउंड : दोनों खिलाड़ी आक्रमक दिखीं। दोनों ने राइट जैब के साथ फिस्ट के संयोजन से हावी होने की कोशिश की। दोनों मुक्केबाजों की एक जैसी रणनीति थी। शुरुआत में हना ने अच्छे पंच मारे जो सटीक रहे। हालांकि, आखिर में मैरीकॉम ने दूरी बनाते हुए अपने लिए मौके बनाए और मौका मिलने पर पंच मार अंक बटोरे।
तीसरा राउंड : शुरुआती एक मिनट में मैरीकॉम ने राइट और लेफ्ट जैब के संयोजन से तीन-चार अच्छे पंच स्कोरिंग एरिया में मार जजों को प्रभावित किया। हालांकि, यहां से हना बेहद आक्रामक हो गईं। मैराकॉम को उन्हें संभालना थोड़ा मुश्किल हो गया लेकिन अनुभवी भारतीय बॉक्सर ने धैर्य बनाए रखा और जब-जब हना लापरवाह दिखीं तब पंच मार अंक बटोरे।
2020 टोक्यो ओलिंपिक में भी उतरेंगी
इस चैम्पियनशिप में उतरने से पहले मैरीकॉम ने कहा था कि वे सौ फीसदी फिट हैं और 2020 टोक्यो ओलिंपिक में भी उतरेंगी। टूर्नामेंट से पहले सभी खिलाड़ियों का फिटनेस चेक करने के लिए 100 मीटर की रेस हुई थी। वे रेस में दूसरे नंबर पर रही थीं।
विश्वकप में मैरीकॉम के पदक
| साल | जगह | पदक |
| 2001 | पेंसिलवेनिया | रजत |
| 2002 | तुर्की | स्वर्ण |
| 2005 | रूस | स्वर्ण |
| 2006 | नई दिल्ली | स्वर्ण |
| 2008 | चीन | स्वर्ण |
| 2010 | बारबाडोस | स्वर्ण |
| 2018 | नई दिल्ली | स्वर्ण |
News Source:this article has been taken from https://www.bhaskar.com






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