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Friday, October 5, 2018

रिपोर्ट / 300 में फेसबुक पासवर्ड, 71 हजार में यूजर की ऑनलाइन डिटेल, डार्क वेब पर मौजूद है हर डाटा

image credit-https://bhaskar.com

गैजेट डेस्क. इंग्लैंड की फर्म Money Guru के रिसर्चर ने अपनी स्टडी में खुलासा किया है कि किसी भी व्यक्ति के फेसबुक लॉग-इन और पासवर्ड डार्क वेब पर सिर्फ 3.90 डॉलर (करीब 287 रुपए) में बिक रहे हैं। वहीं किसी भी व्यक्ति के ईमेल लॉग-इन और पासवर्ड भी 2.74 डॉलर (करीब 200 रुपए) में यहां से खरीद सकते हैं।


इतना ही नहीं, Money Guru ने अपनी रिपोर्ट में ये भी कहा है कि डार्क वेब पर सिर्फ फेसबुक अकाउंट की डिटेल ही नहीं बल्कि किसी भी व्यक्ति के सोशल मीडिया अकाउंट समेत ऑनलाइन शॉपिंग और बैंकिंग डिटेल्स को भी खरीदा जा सकता है।

व्यक्ति की ऑनलाइन डिटेल्स सिर्फ 71 हजार में

  1. इस रिपोर्ट के मुताबिक, किसी भी व्यक्ति की सारी ऑनलाइन डिटेल्स सिर्फ 970 डॉलर (करीब 71 हजार रुपए) रुपए में बिकती है।
  2. ऑनलाइन डिटेल्स में व्यक्ति के यूजरनेम, पासवर्ड, ई-मेल एड्रेस और अकाउंट डिटेल्स (नाम, पता, फोन नंबर) शामिल होते हैं। इन डिटेल्स को कंपनियों को बेच दिया जाता है।

इंस्टाग्राम-ट्विटर की डिटेल्स भी मिलती है यहां

  1. Money Guru की रिपोर्ट में बताया गया है कि डार्क वेब पर इंस्टाग्राम, ट्विटर जैसी सोशल साइट्स के डेटा भी बेचा जाता है। यहां पर किसी व्यक्ति के इंस्टाग्राम अकाउंट की डिटेल 6.30 डॉलर (करीब 460 रुपए) और ट्विटर अकाउंट की डिटेल 3.26 डॉलर (करीब 240 रुपए) में बिकती है।
  2. इसके अलावा रेडिट अकाउंट की डिटेल 2.09 डॉलर (करीब 150 रुपए), पिंटरेस्ट की डिटेल 8.48 डॉलर (करीब 625 रुपए) और जीमेल अकाउंट की डिटेल 3.26 डॉलर (करीब 240 रुपए), हॉटमेल की डिटेल 3 डॉलर (करीब 220 रुपए) में डार्क वेब पर बेची जाती है।

क्या होता है डार्क वेब?

  1. साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट रक्षित टंडन ने बताया कि 'इंटरनेट का 96% डार्क वेब है और हम जो इंटरनेट देखते हैं वो सिर्फ 4% है। डार्क वेब पर हैकर्स यूजर्स का डेटा हैक करने में लगे रहते हैं और इन्हें फिर बेचा जाता है।'
  2. उन्होंने बताया कि 'डार्क वेब पर इंटरनेट के आम ब्राउजर पर नहीं खुलते और इन्हें सिर्फ TOR ब्राउजर पर ही खोला जा सकता है और इन्हें ट्रैक करना काफी मुश्किल होता है।'
  3. रक्षित टंडन ने बताया कि 'डार्क वेब का इस्तेमाल ज्यादातर आपराधिक गतिविधियों के लिए ही किया जाता है। यहां पर हैकिंग सर्विस की तरह होती है, मतलब पैसे देकर किसी की भी हैकिंग करवाई जा सकती है।'

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