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Wednesday, September 12, 2018

कुपोषण मुक्त भारत बनाने में युवा इंजीनियर विनोद चला रहे मुहिम

सोशल मीडिया में अपने जन्मदिन के खर्चे पर कुपोषण से निपटने कर रहे अपील।

भोपाल (म.प्र.):   कुपोषण मुक्त भारत जैसी विचारधारा पर अब युवा वर्ग भी आगे आ रहे हैं। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा की आदिवासी तहसील तामिया के एक छोटे से गांव चावलपानी में 14 सितंबर 1991 को जन्मे युवा इंजीनियर विनोद एम. नागवंशी  घर से दूर राजधानी भोपाल में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। आने वाले 14 सितम्बर को उनका 27वा जन्मदिन है, उन्होंने अपने जन्मदिन पर खर्च होनी वाली राशि को कुपोषण मुक्त भारत बनाने के उद्देश्य से अपना सहयोग दिया है।





 उन्हीने सभी राशि से जरूरतमंद लोगों को भोजन दान करने का संकल्प लिया है। तथा लोगो से भी सोशल मीडिया पर जरूरतमंदों को भोजन भोजन दान करने की अपील कर रहे हैं। वे 14 सितम्बर को शाम 6 से रात के 10 बजे तक राजधानी भोपाल के रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड तथा विभिन्न चौराहों पर जरूरतमन्द लोगो को भोजन के पैकेट वितरण करने वाले हैं। 

उन्होंने बताया कि भारत में कुपोषण की समस्या बेहद चिंताजनक है, संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताविक भारत में हर साल कुपोषण के कारण मरने वाले पांच साल से कम उम्र वाले बच्चों की संख्या दस लाख से भी ज्यादा है, राजस्थान और मध्य प्रदेश में किए गए सर्वे में पाया गया कि देश के सबसे गरीब इलाकों में आज भी बच्चे भुखमरी के कारण अपनी जान गंवा रहे है संयुक्त राष्ट्र ने भारत में जो आंकड़े पाए हैं, वे अंतरराष्ट्रीय स्तर से कई गुना ज्यादा हैं. ये स्थिति बाकई बेहद "चिंताजनक" है। 


इस समस्या से निपटने के लिए आम जानता को भी आगे आना होना। हम सब जरूरतमंद लोगों की सहायता कर सकते हैं। दान तो सभी धर्मों के आदर्श सद्गुणों का महत्वपूर्ण स्तम्भ माना जाता है पर चिंताजनक है कि देश में कई लोग भूख से दम तोड़ देते है वही कई लोग बचे हुए भोजन को बेकार समझकर कूड़े में फेंक देते है। प्राचीन काल में थानेश्वर के सम्राट हर्षवर्द्धन प्रभाकरवर्धन पुष्यभूती (जिनका शासन 606 से 647 तक रहा) की दान शीलता इतिहास में अमर है उनके दान मेलों ने ही आगे चलकर कुम्भ मेलों का स्वरूप ग्रहण किया है। 
युवा इंजीनियर विनोद एम. नागवंशी

हम विभिन्न प्रकार के समारोहों में पैसा और बहुत सा भोजन बर्बाद करते हैं जबकि दुनिया मे आज भी रोटी के लिए हजारों जरूरतमंद तरसते है। हमे इस गंभीर समस्या पर चिंतन करने की आवश्यकता है। भोजन की बर्बादी न करें और न करने दें इसका सम्मान करें। बचत की गई राशि और भोजन से जरूरतमंद लोगों की मदत करें, उन्हें भोजन दें। दुनिया का कोई भी आदमी भूखा न सोए, इस हेतु परोपकार की भावना के साथ भूखों के लिए दान से भोजन की व्यवस्था का सूत्रपात हम सबको करना ही होगा तभी भारत कुपोषण मुक्त होगा। 


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