◆ एवरेस्ट फतह करने वाली म.प्र. की पहली व सबसे कम उम्र की महिला वनी पातालकोट के तामिया की भावना डेहरिया।
◆ छिंदवाड़ा जिले के आदिवासी विकासखंड तामिया से है भावना डेहरिया।
जिद, जज्बे और जुनून की यह कहानी है भावना डेहरिया की। 27 साल की भावना छिंदवाड़ा जिले के आदिवासी अचंल और सतपुड़ा की मिनी रानी कहे जाने वाले तामिया हिल स्टेशन से आती है, बहुत ही साधारण से परिवार में जन्मी भावना ने सपना भी देखा तो दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर कदम रखकर तिरंगा लहराने का। भावना जब एवरेस्ट मिशन पर घर से निकल रही थी तभी उन्होंने माँ से कहा था-"माँ में एवरेस्ट पतह करके ही बापिस लौटूंगी।"
उनके इसी आत्मविश्वास और जुनून से उन्हें प्रदेश की पहली माउंट पर्वत रोही होने का गौरव प्राप्त हुआ।
■ सबसे कम उम्र की पर्वतारोही-
महज 27 साल की उम्र में भावना ने 22 मई 2019 की सुबह दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत पर पहुंचकर देश का तिरंगा लहराते हुए मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया। इसके साथ दुनिया की सबसे ऊंची चोटी 8848 मी. ऊँची माउंट एवरेस्ट फतेह करने वाली मध्य प्रदेश की पहली व सबसे कम उम्र की महिलाओ बन गई है।
■ पिता को है बेटी पर गर्व:
पर्वतारोही भावना के पिता मुन्नालाल डेहरिया छिंदवाड़ा के देलाखारी स्थित सरकारी हायर सेकंडरी स्कूल में शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां उमा देवी गृहिणी हैं। भावना के पिता मुन्नालाल डेहरिया ने कहा कि बेटी ने तामिया ही नहीं, बल्कि प्रदेश सहित पूरे देश का मान बढ़ाकर साबित किया है कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं।
भोपाल से पढ़ाई कर रही भावना वर्तमान में भोपाल के वीएनएस कॉलेज से फिजिकल एजुकेशन में एमपीएड कर रही हैं। वे वहां की छात्र संघ अध्यक्ष भी हैं।
■ सीएम कमलनाथ ने दी थी आर्थिक मदत-
पर्वतारोही बेटी भावना डेहरिया को माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए सीएम कमलनाथ ने 27 लाख 50 हजार की आर्थिक मदत दी थी।
■ पहले भी कर चुकी है पर्वतारोहण-
गौरतलब है कि 2017 मे पर्वतारोही भावना ने 5760 मीटर की ऊंचाई पर जाकर हिमालय के डीकेडी पर तिरंगा फहराने का साहसिक कार्य कर प्रदेश का नाम रोशन किया था।
विनोद एम. नागवंशी ( लेखक एवं समाजसेवी )
◆ छिंदवाड़ा जिले के आदिवासी विकासखंड तामिया से है भावना डेहरिया।
जिद, जज्बे और जुनून की यह कहानी है भावना डेहरिया की। 27 साल की भावना छिंदवाड़ा जिले के आदिवासी अचंल और सतपुड़ा की मिनी रानी कहे जाने वाले तामिया हिल स्टेशन से आती है, बहुत ही साधारण से परिवार में जन्मी भावना ने सपना भी देखा तो दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर कदम रखकर तिरंगा लहराने का। भावना जब एवरेस्ट मिशन पर घर से निकल रही थी तभी उन्होंने माँ से कहा था-"माँ में एवरेस्ट पतह करके ही बापिस लौटूंगी।"
उनके इसी आत्मविश्वास और जुनून से उन्हें प्रदेश की पहली माउंट पर्वत रोही होने का गौरव प्राप्त हुआ।
■ सबसे कम उम्र की पर्वतारोही-
महज 27 साल की उम्र में भावना ने 22 मई 2019 की सुबह दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत पर पहुंचकर देश का तिरंगा लहराते हुए मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश का मान बढ़ाया। इसके साथ दुनिया की सबसे ऊंची चोटी 8848 मी. ऊँची माउंट एवरेस्ट फतेह करने वाली मध्य प्रदेश की पहली व सबसे कम उम्र की महिलाओ बन गई है।
■ पिता को है बेटी पर गर्व:
पर्वतारोही भावना के पिता मुन्नालाल डेहरिया छिंदवाड़ा के देलाखारी स्थित सरकारी हायर सेकंडरी स्कूल में शिक्षक हैं, जबकि उनकी मां उमा देवी गृहिणी हैं। भावना के पिता मुन्नालाल डेहरिया ने कहा कि बेटी ने तामिया ही नहीं, बल्कि प्रदेश सहित पूरे देश का मान बढ़ाकर साबित किया है कि बेटियां किसी से कम नहीं हैं।
भोपाल से पढ़ाई कर रही भावना वर्तमान में भोपाल के वीएनएस कॉलेज से फिजिकल एजुकेशन में एमपीएड कर रही हैं। वे वहां की छात्र संघ अध्यक्ष भी हैं।
■ सीएम कमलनाथ ने दी थी आर्थिक मदत-
पर्वतारोही बेटी भावना डेहरिया को माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के लिए सीएम कमलनाथ ने 27 लाख 50 हजार की आर्थिक मदत दी थी।
■ पहले भी कर चुकी है पर्वतारोहण-
गौरतलब है कि 2017 मे पर्वतारोही भावना ने 5760 मीटर की ऊंचाई पर जाकर हिमालय के डीकेडी पर तिरंगा फहराने का साहसिक कार्य कर प्रदेश का नाम रोशन किया था।
विनोद एम. नागवंशी ( लेखक एवं समाजसेवी )


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