International Women's Day: सभी महिलाओं (मातायें /बहन /बेटियों...... )को अंतराष्ट्रीय महिला दिवस की शिशुपाल यादव की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएँ 💐💐🌹🌹🌺 - Hindi news, Breaking News,Latest News in Hindi, हिंदी न्यूज़, Local News -Samachar Savera

Hindi news, Breaking News,Latest News in Hindi, हिंदी न्यूज़, Local News -Samachar Savera

Daily Updated News

Breaking

Home Top Ad

Post Top Ad

Thursday, March 7, 2019

International Women's Day: सभी महिलाओं (मातायें /बहन /बेटियों...... )को अंतराष्ट्रीय महिला दिवस की शिशुपाल यादव की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएँ 💐💐🌹🌹🌺

सभी महिलाओं (मातायें /बहन /बेटियों...... )को अंतराष्ट्रीय महिला दिवस की शिशुपाल यादव की तरफ से हार्दिक
शुभकामनाएँ 💐💐🌹🌹🌺
🔮महिला सशक्तिकरण🔮
*कहाँ है महिला सशक्तिकरण।* *क्या सिर्फ पाश्चात्य सभ्यता के वस्त्र पहनने से या कुछेक लड़कियों के उच्च शिक्षा ग्रहण कर लेने से या हर फील्ड में ऊँची ऊँची पोस्टों पर अपनी उपस्थिति भर दर्ज कराने से महिला सशक्तिकरण हो गया??? कितनी भागीदारी है लड़कियों की उच्च शिक्षा में, किसी भी ऑफिस में कर्मचारियों चाहे वो अपर ग्रेड हो या लोअर ग्रेड कितना परसेंटेज होता है महिलाओं का?? क्या आज भी ज्यादातर घरों में पेरेंट्स अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए बाहर भेजते हैं? कारण कुछ भी हो, चाहे डर हो असुरक्षा का या पैसों का आभाव, होता है बेटी के लिए ही है। ब्रेन पॉवर कम नहीं है, शारीरिक रूप से कमजोर होने के बाद भी बेटो से अच्छा करने की क्षमता रखने के बावजूद उनको संसाधन नहीं मिल पाते कि वो अपनी पढाई तक पूरी कर पाएं। सिर्फ सोशल साइट्स पर आकर महिला सशक्तिकरण की बात करने से कुछ नहीं होने वाला। देखा है मैंने गांवों में जहाँ तक स्कूल है वहां तक पढ़ाई करने के बाद अपनी शादी का इंतजार करती लड़कियों को। क्योंकि घर वाले दूसरी जगह भेज नहीं सकते लड़कियों को।
  इसमें ज्यादा दोष घर की महिलाओं का भी होता है। आप सब कहेंगे की महिलाओं का दोष कैसे? वो इसलिए कि वो स्वयं इतनी कमजोर हैं, इतनी दबी हुई हैं कि अपनी बात घर के मुखिया यानि कि पुरुष से कह ही नहीं पाती। पुरुष चाहे वो बाबा हो या पिता ज्यादा रोकटोक नहीं करते। रोकटोक का जिम्मा भी औरतों ने ही ले रखा है। माना की असुरक्षा की बात है मगर बेटियां सिर्फ घर में रहकर ही कितना मजबूत बन जाएँगी। उनकी कमजोरी नहीं उनकी हिम्मत बनिए। जो पेरेंट्स हैं वो बेटों के साथ अपनी बेटियों के लिए भी सोचिये। उनको मौके तो दीजिये। सिर्फ ग्रेजुएशन कराकर शादी कर देना ताकि वो सिर्फ किसी की भोग्या या किसी की बहू या बच्चा पैदा करके उनकी देखभाल करने वाली या पूरे घर की बिना वेतन की केअर टेकर बनकर अपनी जिंदगी गुजारें अपने अस्तित्व को भूलकर। क्या आप अपनी नन्ही परी के लिए सिर्फ यही सोचते हैं? मेरी गुजारिश है हमारी सभी  बहन-बेटियों से भी खुद की अहमियत को समझें। पढाई लिखाई कर के स्वयं अपने पैरों पर खड़ी हो तब विवाह करें। विवाह करके अपने जीवनसाथी के कदम से कदम मिला कर गृहस्थी की गाड़ी को चलायें। एक दूसरे के पूरक बनें। एकदूसरे का भावनात्मक सम्बल बने, बोझ नहीं।*
             *सभी अभिभावकों से अनुरोध है कि अपने बच्चों में भेदभाव ना करते हुए उन्हें समान अवसर दें पढ़ने का और बढ़ने का। बहू लाइए तो उसके साथ वैसा ही व्यवहार कीजिये जो आप अपनी बेटी के लिए उसकी ससुराल वालों से चाहते हैं।*
             *सभी बहनों और बेटियों से यही कहना चाहता हूँ  कि अपनी अहमियत समझिये और समाज में खुद को स्थापित करिये। यूँ ही घुटने टेकती रहेंगी तो कोई आपको उठने ही नहीं देगा। पुरुष वर्ग आपके दुश्मन नहीं हैं उनसे लड़ने की बजाय, उनका विरोध करने की बजाय साथ चलना सीखिये। क्योंकि दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं। पत्नी बनें तो सहचरी बनें, बहू बनें तो अपने से बड़ों का सम्मान करें, माँ बने तो अपने बच्चों को संस्कार दें। अपनी गरिमा के साथ और आत्मविश्वास के साथ अपनी क्षमता का उपयोग करें और अपनी नजरों में, अपने माता-पिता की नजरों में, अपने पति की नजरों में और अपने बच्चों की नजरों में सम्मान पाएं।*
                                 *साथ ही इस बात को आप और मैं अच्छे तरीके से जानते हैं कि* *सरकार की तरफ से हर साल महिला दिवस पर बड़े-बड़े* *विज्ञापन जारी किए जाते है ,और हमेशा इस दिन नई नई योजनाएं व घोषणाएं तक की जाती है, और* 
*वहीं समाचार पेपरो मे हमें प्रतिदिन 5-7 साल की बच्चियों के साथ दुष्कर्म की शर्मनाक वारदात देखने को मिल रही है, हर साल यूहीं कागजों पर,  समारोहों में, फोटों मे महिला* *दिवस मनता रहेगा, और यूं ही मासूम बच्चियों के साथ*  *हैवानियत होती रहेगी,  सारी योजनाएं व घोषणाएं कागजों मे ही धरी होकर रह जाती है।*
*जब तक दुष्कर्म को लेकर कोई सख्त कानून नहीं बन जाता,*
*सरकार, मीडिया, और राजनैतिक पार्टियों के लिये अयोध्या मुद्दा, सांसदों, विधायकों* *व अधिकारियों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं व लाभ दिये जाने से फुर्सत मिले तब कहीं जाकर मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म पर प्रभावी कानून बन पायेगा।*
*क्या मासूम बच्चियो के साथ दुष्कर्म करने वाले आरोपियों को सख्त सजा संबंधित कानून बनाने के लिये इस पर बहस होना* *जरूरी नहीं है या सिर्फ बाकी मुद्दे ही बहस के योग्य है*
*ईश्वर नें सृष्टी को दो भागों में विभक्त किया। पुरुष को बल प्रधान और नारी को भावप्रधान बनाया।*
*आज तक तो हमारे समाज में बल की महत्ता रही है लेकिन धीरे धीरे सभ्य होते होते ताकत की जरुरत कमतर होती जा रही है और भावशक्ति का महत्व दिनों दिन बढ़ता जा रहा है।*
*यदि पुरुष को जड़ जगत का राजा कहा जाए तो नारी चेतन जगत की रानी है। साथ भी ये भी साफ़ होता जा रहा है कि चेतन जगत की शक्तियां जड़ जगत से कई-कई गुना अधिक है*
 *आज नारी दिनों दिन अपेक्षाकृत अधिक सशक्त होती दीख रही है।*
 *मैं पूरे दावे के साथ कह सकता हूँ कि आने वाला कल नारी प्रधान ही  होगा !!*
*✍️लेखक आपका :शिशुपाल यादव (म .प्र .पुलिस )*
*सम्पर्क सूत्र-9713670998*

2 comments:

Post Bottom Ad

Pages