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Thursday, February 21, 2019

ईमानदारी से पढ़ाई, संयम और धैर्य परीक्षा में सफलता की कुंजी- शिशुपाल

ईमानदारी से पढ़ाई, संयम और धेर्य परीक्षा में सफलता की कुंजी- शिशुपाल

मेरे सभी युवा साथियों,
आप हमारे भारत देश के आने वाले समय के स्वर्णिम भविष्य हो
आप सबको मेरी तरफ से जय हिन्द,जय भारत।
मैं आशा करता हूँ,कि आप सब अच्छे होंगे। बोर्ड परीक्षाओं के लिए आपकी तैयारी भी अच्छी चल रही होगी।
अगले माह (मार्च) से आपके बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी।और और लगभग मई माह में आप की परीक्षाओ का परिणाम भी आ जायेगा वो समय आप सबकी सफलता की कहानी सुनने व सुनाने का समय शुरू हो जाएगा। मेरे दोस्तों आप सब मेरी एक बात याद रखना कि आप जन्में ही सफलता के लिए हो।सफलता आपका अधिकार हैं बस उस अधिकार को पाने के लिए कुछ करने की ,अपने आत्मविश्वास को जगाने की जरुरत हैं।
परीक्षा तो एक सीढी है जिसे हर कोई पार कर लेता हैं।आवश्यकता है अनुशासन की,संयम की और धैर्य की।।परीक्षा के नाम से केवल आप ही नही बल्कि मैं भी डरता हूं जब भी कोई परीक्षा देता हूं तो एवं दुनिया के हर इंसान को डर लगता हैं। यह समय न केवल आपके लिए बल्कि अभिभावकों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। आपकी तो केवल ज्ञान की परीक्षा हैं लेकिन अभिभावकों की समझदारी और धैर्य की परीक्षा हैं।

परीक्षा के समय तनाव स्वाभाविक होता है।आप पर शिक्षकों का ,माता पिता का समाज का डायरेक्टली तथा इनडायरेक्टली दबाव रहता हैं।
मैं जानता हूँ आप मे से बहुत सारे तनाव को अपने पर हावी नहीं होने देते है लेकिन कुछ स्टूडेंट्स stress के शिकार हो जाते है जिन्हे यदि समय पर काउंसलिंग या साथ नहीं मिलता हैं तो वो डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं और कई बार अनुचित कदम भी उठा लेते हैं।जिससे परिवार पर पहाड़ टूटने जैसी स्थिति पैदा हो जाती हैं।
इसलिए इस परीक्षा की घड़ी मे न केवल आपको को बल्कि अभिभावकों व शिक्षकों को सतर्क रहने की जरूरत है।
तनाव मे आने का मुख्य कारण होता हैं कि आपने समय प्रबंधन का सही पालन नहीं किया था।
अब इनसे बचने का उपाय यह है कि आज से ही अपनी स्टडी का सही प्लान कर लीजिये ।

रिवीजन पर फोकस करें-

अब सिर्फ और सिर्फ रिवीज़न पर फ़ोकस करें। बेहतर होगा कि अब आख़िरी के इन बचे हुए दिनों का रिवीज़न चार्ट बना लें। और रिवीज़न का क्रम इस तरह से बनाएँ कि डेटशीट का पहला पेपर सबसे अंत में आए। लेखन अभ्यास आपने किया ही होगा। अब उसे धार दें। कॉपी में किस प्रकार से लिखना है उसके महत्व को भी समझें। मैंने तो दसवीं की परीक्षा 2012 में तथा 12वीं की परीक्षा 2014 में उत्तीर्ण की थीं तो मुझे मेरे आदरणीय बड़े भैया प्रताप जी ने टॉपर्स की कॉपी निकलवा कर के  मुझे दी थी और फिर मुझे उसके लिखने का तरीका भी पता चला जिस से मुझे परीक्षा में काफी हेल्प मिली थी , आजकल शायद नहीं निकल पाती है लेकिन आप उनसे संपर्क बनाएं जिन्होंने पिछले साल ही परीक्षा पास की है प्रश्नों के उत्तर थोड़ा-बहुत लिखना जारी रखें। और वो सभी स्टेशनरी ख़रीद लें, जो परीक्षा में इस्तेमाल करनी है।
अब तक जो पढा है वो सभी विषय रिवाइज कर लें। अब नया पढ़ना छोड़ सकते हैं।

परीक्षा के ठीक एक दिन पहले के तनाव से बचने के लिए अभी से तय कर लें,जिस विषय का पहला पेपर हो तो उसके लिए उस दिन कौन-कौन से महत्वपूर्ण टॉपिक रिवाइज करेंगे। क्योंकि पूरे साल का पूरा रिवीज़न एक दिन में करना लगभग असम्भव है।
जो सब्जेक्ट थोड़ा सा कठिन समझ आता है तो उस सबजेक्ट के नोट्स या महत्वपूर्ण खंड दोबारा रिवाइज कर लें।

बोर्ड परीक्षा सिर पर है, और यह भी सम्भव है कि खूब पढ़कर भी आप एक अजीब सा तनाव महसूस कर रहे होंगे। यह बेहद स्वाभाविक है। मैं भी परीक्षा से पहले तनाव का सामना करता हूँ। पर इसका यह मतलब नहीं कि तनाव में बिखर जाएँ। “मुश्किलें सब पर आती हैं, कोई बिखर जाता है, और कोई निखर जाता है।"

यह आप बखूबी समझते हैं कि व्यर्थ के तनाव से कोई फायदा तो होने से रहा, बल्कि नुकसान ज़रूर हो सकता है। अगर आप स्ट्रेस लेकर एग्जाम देने जाते हैं, तो आप काफी एक्सट्रीम चले जाते हैं और पेपर में सभी प्रश्नों के उत्तर नहीं लिख पाते हैं।

जो आपने नहीं पढ़ा है, जरुरी नहीं कि परीक्षा में वही आएगा। अतः जितना पढ़ा है, उतना काफी है। बस उसे दोहराते रहें और कूल रहें।

किसी भी विषय के पेपर में किसी एक प्रश्न या समस्या पर ज्यादा केंद्रित न हों,नहीं समझ आ रहा है तो उससे ध्यान हटाकर आगे बढ़ें।

साल भर की तैयारी एक तरफ है और परीक्षा के दिन आपका प्रदर्शन एक तरफ है। अतः सिर पर ज़्यादा बोझ न रखते हुए मुस्कुराते हुए परीक्षा देने जाएं।

साथ ही यह भी कि अपने स्वास्थ्य का ख़ुद ध्यान रखें, छोटी-छोटी बातों पर कनफ़्यूज न हों और तनाव न लें।
पढ़ाई में मन नहीं लग रहा हो ,डिप्रेशन जैसा लग रहा हो तो अपनी इस समस्या को मम्मी- पापा, भाई- बहन, मित्रों और शिक्षकों के साथ शेयर कीजिए।कोई न कोई रास्ता निकल ही आएगा ।अपने को अकेला न समझे।यह परीक्षा केवल एक कक्षा की परीक्षा हैं न कि जीवन की । ऐसा कोई विरला ही इंसान होगा जो हमेशा हर परीक्षा में पास हुआ हो।किसी न किसी परीक्षा मे वो भी असफल रहा ही होगा।
परीक्षा प्रति वर्ष होती हैं लेकिन जीवन एक बार खो दिया तो दुबारा नहीं मिलेगा।इस समय आपको अपने आत्मविश्वास को बनाए रखने की, धैर्य की एवम् संयम की जरुरत हैं न कि बैचेन होने , निराश होने की।
परीक्षा के समय अभिभावकों को भी सजग व सतर्क रहना चाहिए।इस समय बच्चों को आपके साथ की,आपके दो प्यार भरे शब्दों की जरूरत हैं।हमेशा नजर रखें कि बच्चे का व्यवहार मे अचानक बदलाव तो नहीं आ रहा।चिड़चिड़ापन ,कम खाना खाना,कम नींद की और सिर दर्द व माइग्रेन की शिकायत कर रहा है तो जरूर उसे गंभीरता से लिजिए ।डॉक्टर से सलाह जरूर लिजिए ।बच्चों का हौंसला बढ़ाते रहिये।
शिक्षकों को भी सतर्क रहने तथा ऐसे बच्चों की पहचान करके काउंसलिंग करने एवम् अभिभावकों को सूचित करने की जरुरत है।अपनी तरफ से बच्चों का हिम्मत व हौसला बढाये।कभी भी हतोत्साहित न कीजिए।मनोबल बढाने वाली कहानियां बहुत कारगर रहतीं है।
साथियों एक बार फिर दोहराना चाहता हूँ कि आप सफल होने ही इस दुनिया में आए हो कोई भी आपको फेल नहीं कर सकता ।इस वाक्य को बार बार दोहराते रहिए।परीक्षा कक्ष मे घुसते समय भी और प्रश्न पत्र को हल करने से शुरु करने से पहले भी।
अगर फिर भी कोई बात आपको परेशान कर रही है, तो उसे अपने बोर्ड की परीक्षा के बाद के लिए छोड़ दें।
मेरी शुभकामनाएं आपके साथ है।

आपका दोस्त :-शिशुपाल यादव (मध्यप्रदेश पुलिस)
सम्पर्क सूत्र-📞9713670998

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