करीब डेढ़ साल छिंदवाड़ा (मप्र) के SP रहे गौरव तिवारी। वे कटनी हवाला कांड में निष्पक्ष जांच करने के बाद चर्चा में आए थे।
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| IPS गौरव तिवारी |
छिंदवाड़ा': कटनी हवाला कांड' की निष्पक्ष जांच करने पर सुर्खियों में आए SP गौरव तिवारी का छिंदवाड़ा (मप्र) ट्रांसफर कर दिया गया था। करीब डेढ़ साल बाद इलेक्शन की सुगबुगाहट के बीच उन्हें अब देवास (मप्र) भेज दिया गया है। इस लोकप्रिय IPS के ट्रांसफर की खबर सुनकर लोग फूट-फूटकर रो पड़े। लोगों का प्यार देखकर SP भी अपने आंसू नहीं रोक पाए। अपनी दिलेरी से सभी का दिल जीतने वाला ये पुलिस अफसर यूपी के बनारस में तिवारीपुर का रहने वाला है।
पुलिस की नौकरी के लिए गौरव भले ही दूसरे स्टेट चले गए हैं, लेकिन उनके माता-पिता आज भी तिवारीपुर में ही हैं। पिता किसानी करते थे। गौरव के पिता अरुण तिवारी और मां सरिता ने गौरव की पर्सनल लाइफ से जुड़ी बातें शेयर की थीं। सरिता तिवारी ने बताया, 'मई 2015 की बात है। तब गौरव की पोस्टिंग बालाघाट (मप्र) थी। मेरी बहू आभा प्रेग्नेंट थी। उसे डिलीवरी के लिए हॉस्पिटल में एडमिट करवाया था।'
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| पत्नी आभा के साथ IPS गौरव तिवारी |
- 'गौरव के पास नक्सलियों से जुड़े एक सीक्रेट मिशन पर जाने के ऑर्डर्स थे। वो रात में निकलने ही वाला था कि तभी बहू को लेबर पेन शुरू हो गया। तुरंत डॉक्टरों ने उसका इमरजेंसी सिजेरियन ऑपरेशन किया। आभा ने रात 12 बजे मेरी पोती को जन्म दिया। गौरव अपनी बेटी को गोद में लेकर भावुक हो गया था। एक तरफ उसे ड्यूटी पर जाना था और दूसरी तरफ हाथ में नवजात बेटी थी। गौरव ने मुझसे कहा - बेटी को देखकर जा रहा हूं। बड़ा मिशन है, पूरा करके ही लौटूंगा।'
- पिता अरुण तिवारी ने बताया कि तब गौरव ने 2 दिन बाद फोन करके गुड न्यूज सुनाई। उसने 35 लाख रुपए के इनामी नक्सली दिलीप गुहा को अरेस्ट कर लिया था। वो 19 मर्डर का आरोपी था, जिसे सिर्फ एमपी ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की पुलिस भी ढूंढ रही थी।
आज भी नहीं बैठता पिता के सामने
- मां सरिता ने बताया, 'गौरव आज भी अपने पापा के सामने नहीं बैठता। हमेशा आदर से खड़ा रहता है। मैं उसे अतुल कहकर पुकारती हूं। अतुल, जिसका सीना हनुमान की तरह है और जनता सीने में रहती है।'
- 'पुलिस की नौकरी में आने के बाद भी गौरव जज्बाती व्यक्ति हैं। आज भी वो मुझे स्टेशन छोड़ने आता है तो इमोशनल हो जाता है और रोने लगता है।'
- मां सरिता ने बताया, 'गौरव आज भी अपने पापा के सामने नहीं बैठता। हमेशा आदर से खड़ा रहता है। मैं उसे अतुल कहकर पुकारती हूं। अतुल, जिसका सीना हनुमान की तरह है और जनता सीने में रहती है।'
- 'पुलिस की नौकरी में आने के बाद भी गौरव जज्बाती व्यक्ति हैं। आज भी वो मुझे स्टेशन छोड़ने आता है तो इमोशनल हो जाता है और रोने लगता है।'
| मां के साथ IPS गौरव तिवारी के बचपन की फोटो |
टाटा कंपनी में भी की है नौकरी
- गौरव ने बताया था कि वे शुरू से ही आईपीएस अफसर बनना चाहते थे, लेकिन सिविल सर्विसेस की पढ़ाई करने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे।
- गौरव ने बताया था कि वे शुरू से ही आईपीएस अफसर बनना चाहते थे, लेकिन सिविल सर्विसेस की पढ़ाई करने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे।
- इसलिए उन्होंने इंजीनिरिंग करने के बाद टाटा कंपनी ज्वॉइन कर ली। दो साल काम करने के बाद जब पैसे जमा हुए, तो वे आईपीएस की कोचिंग करने के लिए दिल्ली चले गए। इसके बाद उनका सिलेक्शन हो गया।
कुल 1400 रुपए महीना में की IPS की तैयारी
- पिता अरुण तिवारी ने बताया, 'दिल्ली में पीएससी की तैयारी के दौरान वो महज 7000 रुपए बतौर जेब खर्च लेता था। दिल्ली जैसे शहर में वो 2600 रुपए टिफिन और 3000 रुपए रूम के किराए पर खर्च करता था।'
- 'बचे हुए 1400 रुपए में ही वो अपने स्टडी मटेरियल और अन्य जरूर सामान जुटाता था।'
- पिता अरुण तिवारी ने बताया, 'दिल्ली में पीएससी की तैयारी के दौरान वो महज 7000 रुपए बतौर जेब खर्च लेता था। दिल्ली जैसे शहर में वो 2600 रुपए टिफिन और 3000 रुपए रूम के किराए पर खर्च करता था।'
- 'बचे हुए 1400 रुपए में ही वो अपने स्टडी मटेरियल और अन्य जरूर सामान जुटाता था।'



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